कुरान और बाइबिल

कुरान और बाइबिल का ज्ञान ब्रह्म/काल द्वारा भेजे गये नबियों और पीरों के माध्यम से उतारा गया है।

इन पवित्र पुस्तकों में कुछ ज्ञान प्रभु का ज्यों का त्यों लिखा हुआ है और
कुछ ज्ञान फरिश्तों तथा
प्रेत आत्माओं का है जो नबियों में प्रवेश करके परमेश्वर के ज्ञान के विपरीत बातें बताते थे जिसे कुरान और बाइबिल में लिपिबद्ध किया गया।

बाईबल 2 कुरिन्थियों 2ः12-17 पृष्ठ 259-260 में स्पष्ट लिखा है-




(17) हम उन लोगों में से नहीं हैं जो परमेश्वर
के वचनों में मिलावट करते हैं। हम तो मन की सच्चाई और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर की उपस्थिति जान कर मसीह (नबी) में बोलते हैं।


इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं --
1. मसीहा (नबी अर्थात् अवतार) में कोई अन्य फरिश्ता बोलकर किताबें लिखाता है जो प्रभु का भेजा हुआ होता है वह प्रभु का संदेश ज्यों का त्यों बिना परिवर्तन किए सुनाता है।

2. दूसरी बात यह भी सिद्ध हुई कि मसीह (नबी) में अन्य आत्मा भी बोलती हैं
जो अपनी तरफ से मिलावट करके भी बोलते हैं।
यही कारण है कि कुरान शरीफ (मजीद) तथा बाईबल आदि में माँस खाने का आदेश अन्य प्रेत आत्माओं का है जो मांस खाने की आदी थी, वे नबियों में प्रवेश करके मांस खाने जैसा आदेश दिया लोगों ने उसे परमेश्वर का आदेश जानकर पवित्र पुस्तकों में लिख दिया।
यह प्रभु का आदेश नहीं है।
परमेश्वर का आदेश बाईबल के "उत्पत्ति ग्रंथ" में स्पष्ट लिखा है कि मनुष्य को "बीज वाले पेड-पौधे और फल" खाने का आदेश है,मांस खाने का नहीं!

अधिक जानकारी के लिए
संत रामपाल जी महाराज
द्वारा रचित ज्ञान गंगा पुस्तक अवश्य पढ़ें.


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