क्या परमात्मा का #जन्म भी होता है ❓
गरीब,
सजन सलौना राम है, अचल अभंगी एक।
आदि अंत जाके नहीं, ज्यूं का त्यूंही देख।।
सरलार्थ:- अचल (स्थिर-स्थाई) अभंगी (जो कभी नहीं टूटे यानि अविनाशी) वह तो एक ही प्रभु
(परम अक्षर ब्रह्म) है। उसका आदि (जन्म अर्थात् प्रारम्भ) तथा अंत (मृत्यु) नहीं है। वह तो
सदा_से_ज्यों_का_त्यों_ही_दिखाई देता है। आप भी साधना करके उसे देखो।

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